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Saturday, December 15, 2012

अब भी जब कोई मेरे बारे में बात करता है, बहुत जल्द घबरा जाती है वो



अजीब बात है अजीब खयालो में खो जाती है वो
कई बार पास होके भी दूर चली जाती है वो

अब भी जब कोई मेरे बारे में बात करता है
बहुत जल्द घबरा जाती है वो

कुछ भी होने का डर दुनिया का सबसे बड़ा डर है
शायद इसी डर से किसी भी पल डर हो जाती हो वो

मेरा प्यार है या उसका वजूद है ये

कभी पूछो तो खामोश हो जाती है वो

कितना प्यार करता हु बता नहीं सकता उसको
मनी' जब कोई और बताता है तो रूठ जाती है वो
---------------------------------मनीष शुक्ल

Thursday, December 6, 2012

मजा तो अब है बात करने का , हम कुछ न कहते वो सब जान जाते



लब जो बंद रहते है उन्हें खोलो जरा
जो बात आँखों से कहते है लबो में पिरो द जरा
हम निगाहें की भाषा पढ़ नहीं पाते
चुपके से मेरे कानो में कुछ कह दो जरा


इन्तजार लगता है उनका सदियों से जादा
मिलना उनका लगे खुशीयों से जादा
अब तो बस बन जाये वो मेरे हम सफ़र
देदे ए खुदा मुझे मेरे सपनो से जादा


दिल की बातो को वो जान जाते
कैसे जीते है उनके बिन जान जाते
मजा तो अब है बात करने का
हम कुछ न कहते वो सब जान जाते

.........ABHI

Tuesday, November 6, 2012

दिल को दिलो से चलो जोड़ा जाए लोगो को मोहब्बत की तरफ मोड़ा जाए

दिल को दिलो से चलो जोड़ा जाए
लोगो को मोहब्बत की तरफ मोड़ा जाए

जो लोग डरते है दिल लगाने से
उनको इस जंग में छोड़ा जाए

नए दौर में कुछ हटके जरा सोचा जाए
चले आ रहे रिवाजों को अब तोडा जाए

कौन कहता है की दिल बिकाऊ है यहाँ पर
ऐसे बयानों को तो बेख़ौफ़ मरोड़ा जाए

जान देकर भी 'मनी 'दिल मिल जाए किसी का
तो बनके मिशाल यहाँ दुनिया को छोड़ा जाए
======================मनीष शुक्ल 

Life is Just a Life: पिता: एक आकाश Pita: A Sky

Life is Just a Life: पिता: एक आकाश Pita: A Sky: कुछ सर्द लम्हों   की किताबें, जिन्दगी   गाती रही, उसके बाल भी पकते रहे और  झुर्रियां चढती रही। फ़िर चाहे रात दिन  खटता रहा हो  बाप ...

Monday, November 5, 2012

गुजारिश इतनी सी ....

ऐ चाँद आज धीरे चल,
चाँदनी के साथ तू भी मचल 

आज तू तारो को भी रोक ले ,
मदहोश हो जा तू भी मोहब्बत के नशे में 

ऐ चाँद आज अमावस तो नहीं हैं 
फिर भी तू कही छुप जा 
क्योंकि मेरा महबूब अपने होठो को ,
मेरे लबो से मिलाने से शरमा रहा हैं 

नजरो से नजरे चुरा रहा हैं 
आज मेरा प्यार मुझे बुला रहा हैं 

ऐ चाँद आज बिजलियो से कह दे  
के चमक जाये ,
ताकि मेरा महबूब मेरी बाहों से दूर न जाये 

ऐ चाँद आज कुछ ऐसा कर 
के ये रात खुशनसीब बन जाये 

आज ढलने ना दे रात को 
सूरज को भी उगने से रोक ले 

आज मेरी चाहत के खातिर 
बस इतना कर दे ...
(चिराग )
chiragrocks31@gmail.com

Wednesday, October 24, 2012

अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व है दशहरा

अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व है दशहरा .........आइये हम सब भी अधर्म से बचने की कसम खाए
अपनी बुराइयों का रावण जलाये

कविताबाजी की तरफ से आप सभी कवि मित्रो को
                                                            Happy Dashera


Tuesday, October 23, 2012

Life is Just a Life: जीवन - एक तारा Jeevan - ek tara

Life is Just a Life: जीवन - एक तारा Jeevan - ek tara: जीवन अनजानी  राहों पर  चलता एक  तारा है , कब टूट  गिरे मर  जाये पर  सबको  प्यारा है। नहीं दिशा का ज्ञान जरा भी , नहीं ज्ञात है  ल...

Wednesday, October 10, 2012

Life is Just a Life: मरते हुये दीप की आशा Marte Huye Deep Ki Asha

Life is Just a Life: मरते हुये दीप की आशा Marte Huye Deep Ki Asha: इस मरते हुये दीप की आशा , चल लेकर भाग चलें। निःशब्द हवाएँ व्याकुल अंकुर , शब्दों के इस बहिर्जाल में , भाव हुये सुने क्षणभंगुर ,...

Sunday, October 7, 2012

Life is Just a Life: देश अपना मर रहा है Desh Apna Mar raha hai

Life is Just a Life: देश अपना मर रहा है Desh Apna Mar raha hai: चल रही शब्दों  की  कोशिश , अर्थ  देखो डर रहा है , तुम मगर  समझे न समझे , देश अपना मर रहा है। कुछ कार्टूनों की नजर में , संविधान सड़...

Friday, October 5, 2012

मनी' ये कैसा दीवाना पन तुम कैसे हो सच बोलू तो तुम बिलकुल मेरे जैसे हो


मनी' ये कैसा दीवाना पन तुम कैसे हो सच बोलू तो तुम बिलकुल मेरे जैसे हो 
डाटते ही रहते हो या मनाते भी हो मै नहीं मनाता इसिलए तुम वैसे हो ...........;) पर बिलकुल मेरे जैसे हो 
कोई गर्लफ्रेंड है तुम्हारी ,नहीं अरे अब बता भी दो शर्माना क्या बोला तो नहीं ,नहीं तो नहीं >:(  रे बाबा इतना गुस्सा तुम ऐसे हो ........:) पर बिलकुल मेरे जैसे हो 
कुछ काम धाम करते हो या युही अपने जैसा समझ रखा है जैसे तुम वेली हो वैसा ही समझ रखा है ओह तो जनाब .................(y)वैसे हो '''''''''''''''''''''''''अच्छे हो बिलकुल मेरे जैसे हो 
बोल ली अब मै भी कुछ बोलू ओके आई ऍम एगर्ली वेटिंग तुम्हारा कोई बायफ्रेंड है हां है न .................................<:(चलो बाय अरे खयालो में है बाबा .....................................:)तुम्हारी एज क्या है लडकियों से उनकी एज नहीं पूछते ओह तुम लडकियों के भी न भाव अलग ही है पर सच बोलू तुम भी मेरे जैसे हो .............. I LOVE YOU  .......अब तुम बिलकुल वैसे हो मनी'बिलकुल मेरे जैसे हो 
आखिर तुम भी तो मुझे पसंद करती हो बड़े आये मै और तुम्हे, खैर छोड़ो ......;)
अच्छा तो मै चलता हु स्व्वारी ये रुको न :) LOVE YOU TOO
---------------------------------मनीष शुक्ला 














Thursday, October 4, 2012

Life is Just a Life: तब तक भाग्य नहीं बदलेगा Tab tak bhagy nahi badlega...

Life is Just a Life: तब तक भाग्य नहीं बदलेगा Tab tak bhagy nahi badlega...: जब तक  भारत का  आँसू , बस केवल  आँसू बना रहेगा , जब तक  आर्द भाव का  झोंका , केवल झोंका बना रहेगा , जब  तक  भारत का  टुकड़ा , केवल टु...

Tuesday, October 2, 2012

Life is Just a Life: ढलता सूरज dhalta suraj

Life is Just a Life: ढलता सूरज dhalta suraj: डगमगाती चाल , टूटी अस्थियों की ढाल , कुछ बुदबुदाते होंठ , कुछ सहेज रक्खीं चोट , कांपती जर्जर जरा , हर श्वांस  में अनुभव भरा , ...

Friday, September 28, 2012

मेरी लाश लेने आप मत आना बेबे जी कुलबीर को भेज देना कही आप रो पड़ी तो

मेरी लाश लेने आप  मत आना बेबे जी कुलबीर को भेज देना कही आप रो पड़ी तो 

Sunday, September 23, 2012

तू जालिम था फिर भी दिल मेरे पास छोड़ गया , मनी' अजीब था तू अजीब हालातो में छोड़ गया

तू जालिम था फिर भी दिल मेरे पास छोड़ गया 
मनी' अजीब था तू अजीब हालातो में छोड़ गया 

शिकायत करू भी तो किससे सब तो खिलाफ थे 
जिसपे ज्यादा भरोशा था वही साथ छोड़ गया 

तुझे याद करता हू तो कुछ पल में भीग जाता हू 
इन आँखों में ए कैसा असर छोड़ गया

कुछ तो बता दे अब आगे का क्या होगा
तू आएगा कभी य हमेशा के लिए छोड़ गया  

बद्दुआ भी मै दू तो दू तुझे कैसे मेरा गुनाह था
मनी' ए क्या तू तो मेरे संग बदनामी छोड़ गया 
---------------------------------मनीष शुक्ल 



Thursday, September 20, 2012

Life is Just a Life: कैसे स्वर्णिम स्वप्न बुने कविता

Life is Just a Life: कैसे स्वर्णिम स्वप्न बुने कविता: अब पसर गयी हँस  अधरों पर  चूर थक हार उदासी है , आँखों के पोरों पर लूटे पिटे सपनों की ओस जरा सी है। पेट गए पथराये  जहाँ खाने को  खून ब...

Wednesday, September 12, 2012

दुविधा

मैं थी तन मन धन से तुम्हारी,थी समर्पित तुम्हे पूर्ण रूप से,
मैंने तुमसे चाहा था समर्पण,किया विश्वास अपार,
हर कदम पे किया त्याग और बलिदान अपनी खुशियों का,
माँगा था तुमसे विश्वास का आभूषण,पर एक दिन पाया बहुत कुछ तुमसे,
क्या अब मैं हो सकूँगी तुम्हारी,कर सकूँगी तुमपे फिर से विश्वास,
कैसे निभाऊं  इस जन्म जन्म के साथ को,
कैसे आऊं तुम्हारे पास,या अपना लूँ मैं भी एक आवरण,
और उसके सहारे जीवन को काट लूँ?
या सच्चाई  को अपनाऊं, कैसे इस दुविधा से बहार आऊं 

Saturday, September 8, 2012

अत्यंत दुखद
कलम से कार्टून बनाने वाले पर देशद्रोह बताते हुए सरकार व मुंबई पुलिस ने आज असीम त्रिवेदी को गिरिफ्तार कर लिया उन पर धारा १२४अ राजद्रोह ,66a it act,1971national एम्बलेम लगा कर आज रात ८.३० बजे  बांद्रा कुर्ला मुंबई थाने में गिरिफ्तार किया गया जो की पूर्ण रूप से गलत है एक कार्टूनिस्ट प़र देशद्रोह मै देश का आम नागरिक होते हुए ए बताना चाहता हू की अगर कार्टून बनाना देशद्रोह है तो फिर उन नेताओ को तो फ़ासी होनी चाहिए जो किसी महिला का रेप करते है किसी का क़त्ल करवा देते है और संसद के अन्दर नोटों भरा बैग उछालते है संसद के अन्दर हाथापाई करते है और उन्हें सरकार बाइज्ज़त सम्मान देती है अंग्रेजो से आजादी के बाद सबने आज़ाद देश का सपना देखा था पर हालत इतने बत्तर हों जायेंगे इसकी कल्पना भी नहीं की गयी थी की एक तरफ जो देश को नोच नोच के खा रहे है १००० करोड़ से १००००० करोड़ तक के घोटाले देश को खोखला कर दिया अगर उन गिद्धों का कार्टून बनाया गया तो ए कहा से गलत है वो गोलिया चलाते रहे घोटाले करते रहे और हम अपनी आवाज भी न उठाये और अगर आवाज उठाये तो हम पर राजद्रोह लगा दिया जाए
                                                           
   ....................................................सरकार इन सारे मुकदमो को वापस ले और असीम त्रिवेदी को बाइज्ज़त रिहा करे
मनीष शुक्ल


Thursday, August 30, 2012

मनी 'वक़्त ने हालातों को कितना बदल दिया , पहले किसी और का अब किसी का कर दिया

मनी 'वक़्त ने हालातों को कितना बदल दिया 
पहले किसी और का अब किसी का कर दिया 

जो वादे किये थे सब धरे के धरे रह गए
क्यों तुने खुद को खुद से अलग कर दिया 

मुझे तो आज भी वो लम्हे साफ़ दिखते है 
 तूने क्यों उन लम्हों को धुंधला कर दिया 

बस तेरी याद से ये पलके गीली हों जाती है 
पर तुने तो इन पलकों को बेगाना कर दिया 

पारो जहाँ हों वहां खुश तो हों ना तुम
मुझे तो तुमने पूरा  देवदास कर दिया 
....................................मनीष शुक्ल 

Tuesday, August 21, 2012

मेरे मन की कुछ बातें

मेरे आंगन में
देखो सूरज डूब रहा है।
अब तो तुम लौट आओ।
चांद के रहने तक रह लेना,
तुम साथ आंगन में मेरे ।
- रविकुमार बाबुल

  •  दर्द
आओ कात लें धागा हम तुम।
सिल दें हम अपने रिश्ते को।
जख्मों का इल्जाम न हो तेरे सर,
और जग-जाहिर न हो दर्द मेरा।
- रविकुमार बाबुल

  • तेरा चाहा
खुदा से तुम्हें,
मांगा था मैंने।
वह दे न सका,
तुम्हें मुझको।
तन्हा रहूं,
यह चाहा था तुमने,
कर दिया तेरा चाहा,
तू अब मेरे पास नहीं।
- रविकुमार बाबुल

Life is Just a Life: अश्रु रीते Asru Reete

Life is Just a Life: अश्रु रीते Asru Reete: कब तक तुम्हारी याद के , मोती बनाऊँ अश्रु रीते ? तुम  इंद्रधनुषी रेख हो या , आँख का  काजल सुहाना ? तुम गीत का सृंगार हो या , कोई र...

Wednesday, August 15, 2012

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ता हमारा

 

 

कविताबाजी ब्लॉग की ओर से आप सभी ब्लोगर मित्रों को स्वतंत्रता दिवस की ढ़ेरों शुभकामनाये........!!!!

 
@ संजय भास्कर
 

 


Tuesday, August 14, 2012

मनी' कैसे समझाऊ उन्हें कुछ समझ नहीं आता, समझदार है सिर्फ न समझने का शौक रखते है

मनी' अजीब है वो मोहब्बत का शौक रखते है 
दिल अपनाने का नहीं लगाने का शौक रखते है 

इश्क प्यार मोहब्बत इसका कुछ भी नहीं पता 
बस दिल चीज है चीज को तोड़ने शौक रखते है 

इश्क इबादत है प्यार आत्मा मोहब्बत मंजिल है 
पावन है ए शब्द और वो पालने का शौक रखते है  

मनी' कैसे समझाऊ उन्हें कुछ समझ नहीं आता 
समझदार है सिर्फ न समझने का शौक रखते है 

अजीब जिन्दगी जीते है वो अजीब शौक रखते 
लोगो से मिलने का नहीं खेलने का शौक रखते है 
------------------------------
----मनीष शुक्ल 


Sunday, August 12, 2012

Life is Just a Life: तरश रहीं दो आँखें Tarash Rahin Do Ankhein Apnon ko...

Life is Just a Life: तरश रहीं दो आँखें Tarash Rahin Do Ankhein Apnon ko...: कब से तरश रहीं दो आँखें , अपनों को। जीवन का मोह न छूटा , छूट गए सब दर्द पराए , सुख दुख की राहगुजर में , अपनों ने सारे स्वप्न जलाए...

Thursday, August 9, 2012

पग पग चलत यशोदा माँ को निहारत

पग पग चलत यशोदा माँ को निहारत 
छुप छुप के वह माखन खावत
गुलेल से मटकी फोड़ गिरावत
गोपियों के संग में रास रचावत 
पेड़ पे बैठ के बंशी बजावत 
बंशी के गान से दुनिया लुभावत 
ऐसे मधुर मधुर मुस्कावत 
नन्द लाल,बाल गोपाल कहावत 
बोल कन्हैया लाल की जय
------------------------------मनीष शुक्ल 

Saturday, July 28, 2012

Life is Just a Life: कहीं मर न जाए Kahin Mar Na Jaye

Life is Just a Life: कहीं मर न जाए Kahin Mar Na Jaye: बुन सकता हूँ , रंग बिरंगे स्वप्न रेशमी धागों से , पर डरता हूँ , कहीं ये रंगीन स्वप्न बस न जाएँ , किसी गरीब की आ...

Life is Just a Life: पानी बना बहता रहूँगा Pani Bana Bahta Rahunga

Life is Just a Life: पानी बना बहता रहूँगा Pani Bana Bahta Rahunga: चमचमाती रोशनी देखी है, जिसने ख्वाब में बस , मैं उन्हीं की  आँख का , पानी बना बहता रहूँगा। जिसने स्वेद और रक्त मे...

रात भर...


करके वादा कोई सो गया चैन से 
करवटें बदलते रहे हम रात भर !!१!!
हसरतें दिल में घुट-घुट के मरती रही 
और जनाज़े निकलते रहे रात भर !!२!!
रात भर चांदनी से लिपटे रहे वो 
हम अपने हाथ मलते रहे रात भर !!३!!
आबरू क्या बचाते वह गुलशन कि 
खुद कलियाँ मसलते रहे रात भर !!४!!
हमको पीने को एक कतरा भी न मिला 
और दौर पर दौर चलते रहे रात भर !!५!!
रौशनी हमें दे ना पाए यह चिराग अब 
यूँ तो कहने को वो जलते रहे रात भर !!६!!
छत में लेट टटोले हमने आसमान 
अश्क इन आँखों से ढलते रहे रात भर !!७!!
.........नीलकमल वैष्णव "अनिश".........

Monday, July 23, 2012

हिसाब

हिसाब ना माँगा कभी
अपने गम का उनसे
पर हर बात का मेरी वो
मुझसे हिसाब माँगते रहे ।
जिन्दगी की उलझनें थीं
पता नही कम थी या ज्यादा
लिखती रही मैं उन्हें और वो
मुझसे किताब माँगते रहे ।

काश ऐसा होता जो कभी
बीता लम्हा लौट के आता
मैं उनकी चाहत और वो
मुझसे मुलाकात माँगते रहे ।

कुछ सवाल अधूरे  रह गये
जो मिल ना सके कभी
मैंने आज भी ढूंढे और वो
मुझसे जवाब माँगते रहे ।
- दीप्ति शर्मा

भावपूर्ण श्रधान्जली 
मौका मिला तो एक बार फिर राजेश खन्ना की जिन्दगी जीना चाहूँगा -जतिन अरोरा (राजेश खन्ना )
रोमांस हों या भावपूर्ण अभिनय कोई भी हों राजेश ने जब तक चाहा तब तक उन्हें कोई छू भी नहीं पाया बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजेश(जतिन खन्ना ) ने जब हंट टैलेंट को जीतकर हिंदी सिनेमा में प्रवेश किया तो शुरुवाती दौर में ही उन्होंने दुनिया को दिखा दिया की अब तक जो कमी थी वो अब पूरी हों गयी है फिल्म कोई भी हों अभिनय कोई भी हों राजेश कभी भी पीछे नहीं हटे और हमेशा
अपने उसूलो पे काम किया वक़्त चाहे थियटर का हों या स्कूल के समय ड्रामा का रहा हों उन्होंने हमेशा अपना बेस्ट दिया अपने मित्र रवि कपूर (जीतेन्द्र ) उनकी पहली फिल्म में ऑडीशन देने के लिये कैमरे के सामने बोलना राजेश ने ही सिखाया था। जितेन्द्र और उनकी पत्नी राजेश खन्ना को "काका" कहकर बुलाते थे उनका अंदाज़ बाबू मोशाय का हों या i hate tears का हों हमेशा लाजवाब रहा है और किशोर दा के साथ
इतनी बनती थी जैसा पुराना कोई रिश्ता रहा हों जैसे वो मस्त बैक स्टेज गाते वैसे वो स्क्रीन पर मस्त होके अभिनय करते थे उनकी जिन्दगी में दोस्तों का अहम् हिस्सा रहा हमेशा मस्त रहे .

क्या सोच रहे हों बाबू मोशाय जिन्दगी चार दिन की है जो लो
ए जो आने वाला कल है न बहुत जालिम है पता नहीं आये न आये ,,,समझे बाबू मोशाय

Tuesday, July 10, 2012

Life is Just a Life: माँ, इसमें मेरा दोष न देख Man Ismein Mera Dosh N d...

Life is Just a Life: माँ, इसमें मेरा दोष न देख Man Ismein Mera Dosh N d...: रस्म रिवाजों के चन्दन में , देहरी के  पावन  बंधन में , बंधी रही हूँ बिना शिकायत , पावन  सी   तेरे  कंगन  में , अरुणोदय की प्रथम क...

Monday, July 9, 2012

Life is Just a Life: प्यास बुझ ही तो जाएगी Pyas Bujh hi to Jayegi

Life is Just a Life: प्यास बुझ ही तो जाएगी Pyas Bujh hi to Jayegi: कई आंखें , देख रहीं हैं, आकाश में बिखरी उदासी, छोटा सा बादल , और धरती का उत्सुक चेहरा । एक जलती बुझती आशा , परिवर्तन की जिज्ञा...

Saturday, July 7, 2012

Life is Just a Life: मेरी आवाज

Life is Just a Life: मेरी आवाज: मैं खोना नहीं चाहता अपनी आवाज , एहसानों के नीचे क्यूँ दबाते हो मुझे ? सिद्दत से बेहद चाहा है हमने तुमको , खुद ही कमजोर क्यूँ बन...

Thursday, July 5, 2012

प्राण प्रिये

वेदना संवेदना निश्चल कपट
को त्याग बढ़ चली हूँ मैं
हर तिमिर की आहटों का पथ
बदल अब ना रुकी हूँ मैं
साथ दो न प्राण लो अब
चलने दो मुझे ओ प्राण प्रिये ।

निश्चल हृदय की वेदना को
छुपते हुए क्यों ले चली मैं
प्राण ये चंचल अलौकिक
सोचते तुझको प्रतिदिन
आह विरह का त्यजन कर
चलने दो मुझे ओ प्राण प्रिये ।

अपरिमित अजेय का पल
मृदुल मन में ले चली मैं
तुम हो दीपक जलो प्रतिपल
प्रकाश सौरभ बन चलो अब
चलने दो मुझे ओ प्राण प्रिये ।

मौन कर हर विपट पनघट
साथ नौका की धार ले चली मैं
मृत्यु की परछाई में सुने हर
पथ की आस ले चली मैं
दूर से ही साथ दो अब
चलने दो मुझे ओ प्राण प्रिये ।
--- दीप्ति शर्मा 

Tuesday, July 3, 2012

Life is Just a Life: भारत भोला है Bharat Bhola hai

Life is Just a Life: भारत भोला है Bharat Bhola hai: ये मिली नहीं है चुन  ली है,  मैंने तन्हाई जीवन में , फिर  मैंने ही  राजमहल का, पथ  छोड़ा तरुणाई में , मैं कागज का  लिए सहारा, निकला आग...

Sunday, July 1, 2012

Life is Just a Life: लावारिस गम Lavarish Gam

Life is Just a Life: लावारिस गम Lavarish Gam: बूंदों से आँसू नैना हैं बदरा सूखे हुये ताल सी जिंदगी में , फूलों के बिन एक पागल सा भँवरा , कि विक्षिप्त सा और मदहोश सा ही , क...

Saturday, June 30, 2012

Life is Just a Life: राहों के पत्थर Rahon ke Patthar

Life is Just a Life: राहों के पत्थर Rahon ke Patthar: बूँद बना जीवन चंचल है , कैद सीप में मोती तन्हा। बस बादल जीवित होता है, सीप भला जिंदा होती है ? जिसका स्वप्न न हो उड़ने का, जिसको ...

Tuesday, June 26, 2012

Life is Just a Life: तुम बिन Tum Bin

Life is Just a Life: तुम बिन Tum Bin: तुम बिन  आँसू  पानी से हैं , अखियाँ हैं  अब सूखा पोखर, तुम बिन राहें बड़ी कठिन हैं, कैसे जीतूँ  तुम  बिन होकर । तुम बिन नींद न ...

Friday, June 22, 2012

Life is Just a Life: लाचार आसमान

Life is Just a Life: लाचार आसमान: बेहतर है आसमां का दर्द भी कोई समझे , बादलों की आवारगी कब तक सहेगा वो ? कब तक नंगी आँखों से देखता रहेगा , मरती हुई प्यास ...

Thursday, June 21, 2012

Life is Just a Life: एक नया भारत रच दे, भारत मेरे Ek naya Bharat rach d...

Life is Just a Life: एक नया भारत रच दे, भारत मेरे Ek naya Bharat rach d...: अब एक नया भारत रच दे, भारत मेरे। जब रातों  की  तानाशाही में , सूरज  आने से  घबराता हो , दीप  हो गए  बुझे  चिराग , फि...

Monday, June 18, 2012

Life is Just a Life: हम ही बन जाएँ भागीरथ Ham hi ban jayein Bhageerath

Life is Just a Life: हम ही बन जाएँ भागीरथ Ham hi ban jayein Bhageerath: जीवन दीप लिए कुछ पुत्र, बढ़े पूजन को , माँ की टूटी मूरत । निष्प्राण देश , सुप्त यौवन, असहाय नेतृत्व , दिशाहीन अभिमत । ग...

Life is Just a Life: धुंधला सा अंतर Dhundhla sa Antar

Life is Just a Life: धुंधला सा अंतर Dhundhla sa Antar: धुंधली गत और  आँसू धुंधले , धुंधली चाहत के सपने धुंधले , धुंधले मौसम के किस्से धुंधले , सबके जागीरों में हिस्से धुंधले, सच आखिर...

Sunday, June 17, 2012

Life is Just a Life: राष्ट्र की जिजीविषा Rashtra Ki Jijivisha

Life is Just a Life: राष्ट्र की जिजीविषा Rashtra Ki Jijivisha: भ्रमित देश शूद्र वेश , दुर्दशा भी क्या है शेष , किन गुणों की साधना में , व्यस्त शौर्य का प्रदेश , शक्ति भूल भिक्षु बन , दैन्यता...

मनी'छूट जाये न उनके खाव्बो का कोई हिस्सा हमसे, हम इतनी ताकत लगा के उन खाव्बो को मुकाम करेंगे

हम जब भी कुछ करेंगे तो उनका नाम करेंगे
जिन्होंने दिया जन्म न उनको कभी बदनाम करेंगे 

पला पोषा और ऊँगली पकड़ के चलना सिखाया 
के हम जब भी चलेंगे उनके नाम चलेंगे 

जुड़ा है उनका नाम जो मेरे नाम के साथ 
इसके लिए हम  इश्वर को भी प्रणाम करेंगे 

मनी'छूट जाये न उनके खाव्बो का कोई हिस्सा हमसे 
हम इतनी ताकत लगा के उन खाव्बो को मुकाम करेंगे 

माँ बाप को जो भूला तो उसने जीवन भूला दिया 
मनी'हम तो मरकर भी उनके चरणों की धुल बनेगे 
-------------------------------------मनीष शुक्ल 

Saturday, June 16, 2012

Life is Just a Life: धुंधला सा अंतर Dhundhla sa Antar

Life is Just a Life: धुंधला सा अंतर Dhundhla sa Antar: धुंधली गत और  आँसू धुंधले , धुंधली चाहत के सपने धुंधले , धुंधले मौसम के किस्से धुंधले , सबके जागीरों में हिस्से धुंधले, सच आखिर...

Life is Just a Life: पालतू जुगनू Paltu Jugnu

Life is Just a Life: पालतू जुगनू Paltu Jugnu: देशधर्म क्या  होता है, ये हिन्दू  मुस्लिम क्या जाने ? जिसने देहरी पार न की, मौसम की रंगत क्या जाने ? जिनको नींद  नहीं मिलती है, भूख...

Life is Just a Life: सूखी आँखें Sookhi Ankhein

Life is Just a Life: सूखी आँखें Sookhi Ankhein: सपने टूटे, फिर बिखर गए , आँसू  जेहन में,  ठहर गए , कुछ गिरे मगर नाकाफी थे , जो गिरे न जाने किधर गए ? खुशियाँ बीमार मिलीं मुझको ...

Wednesday, June 13, 2012



इंतिहाऐं इश्क की कम नहीं होती
वो अक्सर टूट जाया करती हैं
मुकम्मल सी वो कुछ यादें
बातों के साथ छूट जाया करती हैं
पहलू बदल जाते हैं जिंदगी के
उन तमाम किस्सों को जोड़ते
जुड़ती है तब जब
ये साँसे डूब जाया करती हैं
©दीप्ति शर्मा

कुछ बातें छोड़ आयी हूँ


आज मैं यादें छोड़ आयी हूँ
कुछ बातें छोड़ आयी हूँ
कुछ खट्टी कुछ मीठी
मुलाक़ातें छोड़ आयी हूँ
चार साल का अनुभव
और वो हँसी मज़ाक़
साथ ले अपने
कुछ पहलुओं को
कुछ वादों को छोड़ आयी हूँ
कुछ बातें छोड़ आयी हूँ
क्या कहूँ क्या दोस्त बने
किसी ने हँसकर पीठ थपथपाई
तो किसी ने पीठ पीछे
मुँह फेरकर जीभ फिराई
पहचान तो गयी रंग भाव
हर एक शख़्स का
उन रंग भाव के मैं
कुछ कसक छोड़ आयी हूँ
शायद कुछ असर छोड़ आयी हूँ
कुछ बातें छोड़ आयी हूँ
कुछ को साथ रखने की
हरदम ख़वाहिश है तो
कुछ की कड़वी बातें झेल आयी हूँ
कुछ बातें छोड़ आयी हूँ
कुछ बातें बुरी लगी किसी की
तो चुप रहना बेहतर समझा
जो चार साल में नहीं बदला
उसे बदलने की चाह छोड़ आयी हूँ
कुछ बातें छोड़ आयी हूँ
बेहतर तो नहीं कह सकती
अपने हर साल को
गुज़र गया हर लम्हा
रोते गाते हँसते..
बहुत कुछ सोचा था पर
अपने अहसासों के दरमियान
तमन्नाओं के आईने में
धुँधली तस्वीरें छोड़ आयी हूँ
कुछ बातें छोड़ आयी हूँ ।
© दीप्ति शर्मा

Wednesday, June 6, 2012

गर जिन्दगी है तो जिन्दगी का साथ होना चाहिए मनी' गर आप है तो आपका एहसास होना चाहिए


गर जिन्दगी है तो जिन्दगी का साथ होना चाहिए
मनी' गर आप है तो आपका एहसास होना चाहिए

अगर वाकई मोहब्बत से कभी कोई रिश्ता रहा है
तय है कही न कही इसका इतिहास होना चाहिए

मुझसे धोखे की उम्मीद कभी मत रखना वादा रहा
वादा करो मेरे विश्वास संग तेरा विश्वास होना चाहिए

जैसे जिन्दगी जीते है हम तुम आजकल
वादा करो रिश्ता ऐसे ही ख़ास होना चाहिए

गर कभी खफा हों जाये हम एक दूजे से
तो उसका हर हाल में आभास होना चाहिए
-------------------------------------मनीष शुक्ल

Friday, June 1, 2012

ये ज़माने वाले जीने नहीं देंगे आपको , जो प्यार का इकरार कर लिया आपने

ये कैसा गुनाह कर लिया आपने 
क्यों यू ही प्यार कर लिया आपने 

इक सलाह के तौर पर बता दिया आपको
जो ख़ाम खा दिलदार कर लिया आपने  

ये ज़माने वाले जीने नहीं देंगे आपको 
जो प्यार का इकरार कर लिया आपने 

अजीब सोचते होगे न मेरे बारे में आप 
पर डरता हू कि ये क्या सोच लिया आपने 

यकीं मानो मोहब्बत खतरनाक सफ़र कराती है 
'मनी' क्यों बस मंजिल को देख लिया आपने 
---------------------------------------मनीष शुक्ल 

Thursday, May 31, 2012

.......गरीब हूँ मैं



रोटी के लिए घूमता रहता हूँ ,
इधर उधर ,
पाँव छिल जाते है ,
रुकता नही हूँ मगर ,
दिल से देगा मुझे कोई उसे भगवान् उसे बहुत देगा
मेरी दुआ है सभी के लिए ,
चाहे कोई बड़ा हो या छोटा ,
मिटटी के खिलौनों से खेलते है बच्चे मेरे ,
गर्मी सर्दी बारिश को   हंस कर झेलते है
सर पर छत भी न दे सका अपने बच्चो को
बाप में अजीब हूँ
गरीब हूँ में मजबूर हूँ मैं ,
पूरी नही कर पाता बच्चो की इच्छाओ को ,
बहुत ही बदनसीब हूँ मैं ,
गरीब हूँ मैं गरीब हूँ मैं......


@ संजय भास्कर

Tuesday, May 29, 2012

मैं आँसुओं को उनसे ........

मैं आँसुओं को उनसे चुराता चला गया
बेफ़िक्र मुझको और रुलाता चला गया
बदलेगा मेरा वक़्त भी ऐ दोस्त एक दिन
यह ऐतबार दिल को कराता चला गया
मिटता रहा हवाओं के संग आ के बार-बार
जो अक्स रेत पर मैं बनाता चला गया
हमदर्द उसे जब से हमने बना लिया
वह दर्द मेरे नाम लिखाता चला गया............

Monday, May 28, 2012

याद आये रात फिर वही

 
अहद तेरा यूँ लेकर दिल में
याद आये रात फिर वही
बदगुमान बन तेरी चाहत में
अपने हर एहसास लिये मुझे

याद आये रात फिर वही
अनछुये से उस ख़्वाब का
बेतस बन पुगाने में मुझे
याद आये रात फिर वही
उनवान की खामोशी में
सदियों की तड़प दिखे और
याद आये रात फिर वही
तेरे ख़्यालों में खोयी
ये जानती हूँ तू नहीं आयेगा
फिर भी मुझे,
याद आये रात फिर वही
याद आये बात फिर वही ।
© दीप्ति शर्मा

Saturday, May 26, 2012

वादा करो मिलके हंगामा करेंगे 'मनी जिन्दगी अब थके उसूलो पे नहीं चलती

जिन्दगी अब उलझे हालातो पे नहीं चलती 
जिन्दगी अब सिर्फ वादों और बातो पे नहीं चलती 

कैसा डर ,किसका डर अब छोड़ दो तुम सारे डर 
यकीन मानो अब जिन्दगी रोने धोने पे नहीं चलती 

वादा करो मिलके हंगामा करेंगे 'मनी 
जिन्दगी अब थके उसूलो पे नहीं चलती 

तुम भी अब खुल के मिलने की आदत ड़ाल लो 
जिन्दगी अब गुप चुप मुलाकातों पे नहीं चलती 

खुल के आओ साथ दो मेरे पीछे तुम 
जिन्दगी अब तानाशाही पे नहीं चलती 
------------------------------------मनीष शुक्ल 







Thursday, May 24, 2012

माँ मम्मी अम्मा


जिद्दी बने तो कारण तुम हो

जीते तो भी कारण तुम हो

गम से ख़ुशी का कारण तुम हो

मेरे होने का कारण तुम हो

अधिकार भी तुम ज़िम्मा भी तुम

माँ मम्मी अम्मा भी तुम

छूटी है जब आस ,तो फिर बात क्या करें ...


है सब ड्रामेबाज़
हैं सब गूंगे साज़ 
हैं खूद में उस्ताद 
है पैसे की बकवास 

छूटी है जब आस ,तो फिर बात क्या करें 
झूठे अश्कों का, अहसास क्या  करें 
किस्से और कहानियों में बाकी है बचा 
जग में मिटा है विश्वास क्या करें 
उलटे सीधे रस्तों पे क्यों न जाऊं मै
मुट्ठी में सूरज  रखूँ, चंदा पाऊँ मै 
तलवारों पे चलने का सुकून जो मिले 
खून भी बहाकर अपना हिस्सा पाऊँ मै 

अब होगा आगाज़ 
बजेंगे सारे साज़ 
है दिल की ये आवाज़ 
दुनिया जानेगी आज 

Monday, May 21, 2012

तू हो गयी है कितनी पराई

अथाह मन की गहराई
और मन में उठी वो बातें
हर तरफ है सन्नाटा
और ख़ामोश लफ़्ज़ों में
कही मेरी कोई बात
किसी ने भी समझ नहीं पायी
कानों में गूँज रही उस
इक अजीब सी आवाज़ से
तू हो गयी है कितनी पराई ।

अब शहनाई की वो गूँज
देती है हर वक्त सुनाई
तभी तो दुल्हन बनी तेरी
वो धुँधली परछाईं
अब हर जगह मुझे
देने लगी है दिखाई
कानों में गूँज रही उस
इक अजीब सी आवाज़ से
तू हो गयी है कितनी पराई ।

पर दिल में इक कसर
उभर कर है आई
इंतज़ार में अब भी तेरे
मेरी ये आँखें हैं पथराई
बाट तकते तेरी अब
बोझिल आहें देती हैं दुहाई
पर तुझे नहीं दी अब तक
मेरी धड़कनें भी सुनाई
कानों में गूँज रही उस
इक अजीब सी आवाज़ से
तू हो गयी है कितनी पराई ।

© दीप्ति शर्मा

Saturday, May 12, 2012

माँ माँ माँ माँ माँ

माँ माँ माँ माँ माँ,,,,,,,,कोई भी काम हों,,,, माँ ,,,,और वाकई हम भारतवासियों के लिए ये बड़ी गर्व की बात है की हमें माँ का प्यार जीवन पर्यंत मिलता है कितना प्यारा नाम है न ,,,,,,माँ,,,, हर बच्चा सबसे पहले एक ह ही नाम लेता है,,, माँ,,, जिसमे कोई भी किरदार ढूढ़ सकते हों जबकि उसे कुछ नहीं सिखाया जाता पर उसे सब आता है वो हमारे लिए व्रत रखती है हमें जीवन भर खुश रखने के सारे प्रयास करती है कितनी अजीब बात है न की अगर हमें किसी पार्टी में जाना हों तो सबसे पहले वो हमारे  बारे में सोचती है और हम भी अपने लिए ही जिद करते है कभी नहीं सोचते की माँ के पास क्या है उसे क्या चाहिए एक बार मैंने सोचा ही की वो समझ गयी मुस्कुरायी ,,,,,,,,आखिर माँ है न सब जानती है ,,,,,,,,,,कुछ यू बोली मेरे लाडले तुम बहुत प्यारे हों पर अब मुझे इन सब चीजो की क्या जरूरत है

मेरी सारी शोभा तो तुमसे है तुम आगे बढ़ो तभी लगा,,,, माँ,,,,,,,सिर्फ  माँ  ,,,,,कहने के लिए नहीं होती ,,,,,माँ,,,,,,, के अन्दर जो ममता स्नेह है वो सारे संसार में कोई और नहीं दे सकता .

माँ चरणस्पर्श 

माँ


जब पहला आखर सीखा मैंने
लिखा बड़ी ही उत्सुकता से
हाथ पकड़ लिखना सिखलाया
ओ मेरी माँ वो तू ही है ।

अँगुली पकड़ चलना सिखलाया
चाल चलन का भेद बताया
संस्कारों का दीप जलाया
ओ मेरी माँ वो तू ही है ।

जब मैं रोती तो तू भी रो जाती
साथ में मेरे हँसती और हँसाती
मुझे दुनिया का पाठ सिखाती
ओ मेरी माँ वो तू ही है ।

खुद भूखा रह मुझे खिलाया
रात भर जगकर मुझे सुलाया
हालातों से लड़ना तूने सिखाया
ओ मेरी माँ वो तू ही है ।
© दीप्ति शर्मा

Friday, May 11, 2012

.......ज़माना कहेगा क्या बात है !

दोस्त को भुलाना गलत बात है,
दोस्ती न निभाना भी गलत बात है
दोस्ती में दिल दुखाना भी गलत बात है
दोस्ती का तो जिंदगी भर साथ है 
अगर भूल गए तो सिर्फ खली है 
अगर साथ रहे तो ज़माना कहेगा क्या बात है !

@ संजय भास्कर 

Tuesday, May 8, 2012

बीत गयी यामिनी ..

मदिर ,मधुर ,धीमी धीमी
गुंजित है रागिनी
सुबह की लाली है
बीत गयी यामिनी ..

कुछ एक पल की जिंदगानी ,
एहसासों की रवानी
वक़्त की कागज़ पर
उकर गयी  सारी कहानी ........

थोड़े तुम थोड़े हम , दोनों का है जहाँ
चलो ख्वाब बाँट ले ,बन जाए आशियाँ

वो खून नहीं ,जिसमे जूनून नहीं
वो अलफ़ाज़ नहीं ,जिसमे आवाज़ नहीं
वो ज़िन्दगी नहीं ,जिसमे बंदगी नहीं
वो बशर कहाँ ,
जिसमे तू तू नहीं ,हम हम नहीं


जब साज तन्हाइयों का और राग खामोशियों का हो
तो ज़िन्दगी हर घड़ी एक संगीत बन जाती है


जब भी मासूम आँखें सवाल करे हैं ,
रब दी कसम बहुत बुरा हाल करे हैं

Sunday, May 6, 2012

manish shukla save your voice

अनशन का पाचवां रोज समाप्ति की ओर एक धृड  निश्चय के साथ बिना ,,जल ,,,के करीब २१ घंटे बीत चुके थे तभी अचानक आलोक और असीम को कुछ पुलिस वाले अस्पताल ले जाने के लिए आ गए उनके मना करने पर भी वो ,या यू कहे जबरन  अस्पताल  राम मनोहर लोहिया  ले गए जहा आलोक और असीम को तुरंत भर्ती कर लिया गया उनकी स्थिति देखते हुए डाक्टर्स ने जानकारी के तौर पे बताया की उनका ब्लड प्रेसर और पल्स रेट काफी कम था और उन्हें ग्लूकोस पे लगा दिया 
                                                                                                                       पर असीम और आलोक ने अस्पताल से ही अनशन जारी रखने की घोसडा कर दी है महत्वपूर्ण बात ये है की ये लड़ाई वो हमारे लिए लड़ रहे है  आशा है की हमारे facebook friends,users ,internet users जरूर आगे आएंगे और आन्दोलन को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे मै एक facebook user होने के नाते उनका सहयोग कर रहा हू अच्छी बात ये है की ये मुद्दा हम सभी का है आज एक दुसरे जुड़े रहने का माध्यम सिर्फ social networking site है जहा हम अपनी बात खुल कर कर सकते है और बहुत लोगो तक पंहुचा सकते है तो दोस्तों आगे आइये और इस मुहिम को आगे बढाइये .

facebook user
manish shukla
 

Monday, April 30, 2012

समझने की कोशिश करता हू जब हर बार लगती हों अनजान हों

क्या बात है बहुत परेशान हों 
बोलती तस्वीर सी सुनसान हों 

समझने की कोशिश करता हू जब 
हर बार लगती हों अनजान हों 

कुछ कहोगे ये सोचता हू जब भी 
झुक जाती हों बस ज़िन्दाजान हों 

मुझे लगता है तुम मेरे साथ हों 
और तुम किसी  की पहचान हों 

क्या कहू करता था या हू या कुछ भी नहीं 
'मनी'मेरे लिए अब तो बस एक मेहमान हों 
--------------------------------मनीष शुक्ल 






किरचों की तरह हटाया तुमने

क्यूं रिश्ता अपना मुझसे रेत सा बनाया तुमने।
और तमाम वायदों को कांच सा बनाया तुमने।

साथ रहना नहीं था तो टूट ही जाना था इसको,
 फिर क्यूं ऐसे ख्वाबों का महल सजाया तुमने।
 
वक्त   का  क्या,   बावफा  कब रहा है किसी का,
और वक्त  की तरह मुझको  आजमाया  तुमने।

तन्हाई के खराब मौसम में रिश्तों को सम्हाला मैंने,
दुपट्टे के कोरों से किरचों की तरह हटाया तुमने।
  
मेरे साथ ताउम्र रहने  की बात तुमने ही कही थी,
जोड़ना कभी, कितनी कस्मों को निभाया तुमने।


  • रविकुमार बाबुल

Saturday, April 21, 2012

रू-ब-रू


वो  पहली  किरण  और  तेरा  चेहरा  ,
बादलों  में  भी   उभर   आई   तेरी  ही  तश्वीर ,
हर  सांस  तेरे  बोलों  पर  थिरकने  लगी ,
तेरे  याद   में  वादियाँ  महकने  लगी ,

 सूरज  की  लालिमा  ने  तेरे  माथे  की  बिंदिया  की  यादें  दिलाईं  ,चहकने  लगे   पंची   जैसे   तेरी  चुरियाँ  मुझे   जगाने  आयीं  ,
शाख  के  पत्ते  झूमने  लगे  ,
होने  लगा   तेरे  पायलिया   का  गुमान ,
मिटटी   की  सोंधी  खुशबू  से  बरबस  आया
तेरे  हथेलियों  की  हिना  का  ध्यान  ,

 और   तभी  एक  पुरवैय्या  आई
और  एक सुंदर  ख्वाब  टूट   गया  
और  सामने  ज़िन्दगी  रू-ब-रू   करने  आ  गयी  थी मुझसे ...

Monday, April 16, 2012

"मेरी ज़िन्दगी...."



कि सावन में भी प्यासी मेरी ज़िन्दगी...
अँधेरे कि तरह सुनसान मेरी ज़िन्दगी...
उस धुएं कि तरह लापता मेरी ज़िन्दगी...
अपने ही जाल में फ़सी मेरी ज़िन्दगी...!!!!

कि सरीफ़ों के महफ़िल में बदनाम मेरी ज़िन्दगी...
भूखे और प्यासे जैसी लाचार मेरी ज़िन्दगी...
कि न्याय और धर्म के बीच लटकती मेरी ज़िन्दगी...
कि जिंदा है जिस्म, पर रूह से मरी मेरी ज़िन्दगी...!!!!

वसंत में भी सूखे सी जंजर मेरी ज़िन्दगी...
मिट्टी के घरोंदों सी कमजोर मेरी ज़िन्दगी...
अमावश में सन्नाटे से चीखती मेरी ज़िन्दगी...
कि हर तरफ है हरियाली पर, वीरान मेरी ज़िन्दगी...!!!!

तन्हाईयों से लिपटी बेजान  मेरी ज़िन्दगी...
कि कोयला भी तप कर हिरा बन जाता है...
पर उस कोयले से लिपटी कारीख मेरी ज़िन्दगी...
कि नग्न पड़ी लाश, बिन कफ़न मेरी ज़िन्दगी....!!!!!!

----राहुल राज

Monday, April 9, 2012

हर लफ़्ज़ का आईना

अपने हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा.
उसको छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा..

तुम गिराने में लगे थे तुम ने सोचा भी नहीं.
मैं गिरा तो मशाल बनकर खड़ा हो जाऊँगा..

tere dast-e-sitam

tere dast-e-sitam kaa ajz nahii.
dil hii kaafir thaa jis ne aah na kii......

Friday, April 6, 2012

फिर जिंदा हो...




इस  किस्तों वाली मौत को 
एकमुश्त मौत दे दो 
फिर खुशियों वाले ब्याज पर 
एक नयी जिंदगी लो
एक सही जिंदगी लो 
फिर जिंदा हो 
फिर जिंदा हो 

क्या खूब मुखौटा पहने है 
क्या खुद पर पर्दा डाला है 
है चमकती पट्टी आँखों पर
समझे खुद को निराला है 
ये झूठ के  परों को कतरों ज़रा 
फिर छूना सच के आकाश को 
अब छोडो, दुनिया के खौफ को 
इस  किस्तों वाली मौत को 
एकमुश्त मौत दे दो 
फिर खुशियों वाले ब्याज पर 
एक नयी जिंदगी लो
एक सही जिंदगी लो 
फिर जिंदा हो 
फिर जिंदा हो 

मन में रखे आईने को 
सही सूरत दे दो, जीने को 
देख दूजों की चकाचौंध 
क्यों खुद पर शरमाते हो 
इस उतरन को उतार फेकों 
फिर अपनी असल चमक देखो 
क्यों गीले कोयले से सुलगते हो 
इस  किस्तों वाली मौत को 
एकमुश्त मौत दे दो 
फिर खुशियों वाले ब्याज पर 
एक नयी जिंदगी लो
एक सही जिंदगी लो 
फिर जिंदा हो 
फिर जिंदा हो 

Thursday, April 5, 2012

"मेरी लाचारी या तुम्हारे लिए मेरा प्रेम..."????


मैं तुम्हें भुलाने की रोज़ कोशिश करता हूँ...
विश्वास  मानो मेरा..
के खुद को तुम्हारे ख्यालों से बहुत दूर ले जाऊं 
ये रोज़ कोशिश करता हूँ...

पर---
तुम्हें दिल से निकलता हूँ तो तुम दिमाग में बस जाती हो...
        दिमाग से निकलता हूँ तो तुम जिस्म में बस जाती हो...
        जिस्म से निकलता हूँ तो तुम निगाहों पे बस जाती हो...
        निगाहों से निकलता हूँ तो हूठों पे बस जाती हो...!!!

पता नहीं आज क्या हो चला है...
दिल आज क्यूँ बहक रहा है...
रातें सुलग रही हैं
दिन क्यूँ चहक रहा है....!!!

क्यूँ आज फिर दिल बच्चा हो जाने को करता है..
क्यूँ आज फिर तुमसे लिपट कर रोने को दिल करता है...
क्यूँ आज फिर तुम्हारे नाम पर मुस्कुराने को दिल करता है...
क्यूँ आज फिर तुम्हारे गोद में सर रखकर सोने को दिल करता है...
क्यूँ आज तुम्हारे आखों में डूब जाने को दिल करता है...
क्यूँ आज तुम्हारे बातों में खो जाने को दिल करता है...!!!!???

क्यूँ आज तुम्हे जी भर कर देखने का मन हो रहा है मुझे...
क्यूँ आज तुमसे मिलने का मन हो रहा है मुझे...
क्यूँ आज फिर तुम्हे i love u  कहने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर तुमसे i love u  सुनने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर तुम्हे छुने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर तुम्हारे लिए घंटो इंतज़ार करने को दिल चाहता है...!!!!???

क्यूँ आज फिर अच्छा पहनने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज  फिर अच्छा दीखने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से बारिश में भीगने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से सपने बुनने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से मुस्कुराने को दिल चाहता है...!!!!???

क्यूँ आज फिर से ज़िन्दगी पे खुश होने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर बाहें फैलाकर गाने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से तुमसे प्यार करने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से जीने को दिल चाहता है...!!!!????

आज शायद अपने दिल पर मेरा कोई काबू नहीं...
आज शायद अपनी भावनाओं पर मेरा कोई वश नहीं...

के दिल तो बच्चा होता है...
और गलतियाँ कर बैठता है...

पर पता नहीं...
तुम मेरी इन गलतियों का क्या निष्कर्ष  निकालोगे---
"तुम्हारे लिए मेरा प्रेम या मेरी लाचारी... "
ये तो तुम ही मुझे बतलाओगे  !!!

Monday, April 2, 2012

सिर्फ तुम ही हर बार लौट कर क्यों आती हों

सिर्फ तुम ही हर बार लौट कर क्यों आती हों 
आखिर तुम क्यों इतना सब कुछ सिखलाती हों 
'मनी' क्यों इतनी वफादार हों तुम '''''''''समस्या      
-------------------------------------मनीष शुक्ल   

Saturday, March 31, 2012

अंधेरे ....!

आओ, सिमट जाएं, हम
अंधेरे में ...
जब -
उजाला होगा
तब -
फिर चल पड़ेंगे ...
सच !
मान जाओ, बात मेरी
ये अंधेरे, यूँ ही नहीं होते....... !!
  
-- मित्र श्याम उदय जी की रचना  !