अगर आप भी इस मंच पर कवितायेँ प्रस्तुत करना चाहते हैं तो इस पते पर संपर्क करें... edit.kavitabazi@gmail.com

Monday, November 28, 2011

मस्त बिंदास ,रहती हों वाकई गज़ब है पर औरो की तरह भाव न खाया करो तुम

धीरे से आराम से खिड़की से मुस्कुराया करो तुम 
नजर लग जाएगी यूही  टहलने न जाया करो तुम 

यू तो सबको अच्छे लगने लगे हों पर 'कोई नहीं 
खासकर ये लाल रंग पहन कर न आया करो तुम 

लाजवाब' अदाए है पास तुम्हारे सच है ये 
पर हस्ते हुए यू ज़ुल्फ़ न लहराया करो तुम  

      मस्त बिंदास ,रहती हों वाकई गज़ब है 
  पर  औरो की तरह भाव न खाया करो तुम 

सच है सभी कहते की बहुत  खूबसूरत लड़की हों तुम 
मनी' पर घंटा घंटा आईने को युही न निहारा करो तुम 
                                   ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मनीष शुक्ल 

6 comments:

  1. नजर लग जाएगी यूही टहलने न जाया करो तुम

    वाह , क्या ग़ज़ब बात कही है ।
    बहुत सुन्दर ।

    ReplyDelete
  2. ....खूब लिख रहे हैं आप मनीष भाई

    ReplyDelete
  3. आपका आभार संजय भाई ,,,,,,,,,बस आजकल थोडा इधर मन लगा रहा हू

    ReplyDelete