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Saturday, November 19, 2011

तुम ऐसे न खुद को चुराया करो , कभी सामने आ भी जाया करो



तुम ऐसे न खुद को चुराया करो
कभी सामने आ भी जाया करो

मै देखने के लिए बैठा हु देखो
कभी तो नजरे मिलाया करो

मै जगता हु सारी राते यहाँ पर
कभी खाव्बो में भी आया करो

बहुत उदास हू आज कल
कभी हँसा भी जाया करो

अब तो लोग कहने लगे है दीवाना
कभी खुद भी हिम्मत दिखाया करो

अब इतना न यु सताया करो
कभी तो दिल से लगाया करो
................मनीष शुक्ल

10 comments:

  1. lovely poem
    kabhi khud bhi himmat dikhaya karo - loved it :)

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  2. अरुण जी आपका आभार

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  3. बहुत उदास हू आज कल
    कभी हँसा भी जाया करो

    क्या बात है बहुत सुन्दर......शुभकामनाएं मनीष भाई

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. manish bhai bahut achhi rachna

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  6. बहुत सुन्दर.....!!

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