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Thursday, August 4, 2011

मधुर कंठ का अनुबंध


मधुर तनय सा मुझको अंग दिया,
जब ईश्वर ने यौवन संग दिया।
रहूं चहकती मैं हर पल ,जो,
जीवन मेरा प्रेम से रंग दिया।
परवाज करूं तूफानों में भी हरदम,
अम्बर सा जो तुमने आंचल दिया।
श्रृंगार किया, निखरा रूप प्रकृति का,
मधुर कंठ का मुझको अनुबंध दिया।
प्रीत भिगोयी निश्छल जल में मैनें,
अधरों को शब्दों का अपनापन दिया।
अनुराग का अनुबंध सहेज रखे मन,
सभी ने तुझको कोमल सम्मान दिया।

कोमल वर्मा

4 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर रचना....

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  2. भाव अच्छे लगे...

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  3. बहुत ही सुन्दर रचना....

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