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Sunday, May 1, 2011

कलम



ये  मेरे साथ रहती है
और सारे दर्द सहती है
पर जिन्दगी से इसे
बहुत हैरानी है
ना ही हँसती ना ही रोती
ये लिखती मेरी कहानी है|
  वो अल्फ़ाज मेरे
  दिल की धडकन के
  सब इसकी जुबानी है
  ये लिखती मेरी कहानी है |
निगरा समझ वो मेरा
सारा जहाँ  बताती है
समझ मुझे लिखा उसने
ये उसकी मेहरबानी है
ये लिखती मेरी कहानी है|
  रुके हुए कुछ झुके हुए
  मेरे अश्कों में उसकी
  हर वक्त निगरानी है
  जब इसकी जुबानी है
  ये लिखती मेरी कहानी है |

-दीप्ति शर्मा

8 comments:

  1. आप की बहुत अच्छी प्रस्तुति. के लिए आपका बहुत बहुत आभार आपको ......... अनेकानेक शुभकामनायें.
    मेरे ब्लॉग पर आने एवं अपना बहुमूल्य कमेन्ट देने के लिए धन्यवाद , ऐसे ही आशीर्वाद देते रहें
    दिनेश पारीक
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2011/04/blog-post_26.html

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  2. ना ही हँसती ना ही रोती
    ये लिखती मेरी कहानी है|bhut accha likhti apki kalam hai...

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  3. बहुत सुंदर भाव युक्त कविता

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  4. sundram !manoharam !
    veerubhai .

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  5. bahut sunder rachanaa.shabdon ka badiyaa chyan.badhaai aapko .

    please visit my blog www.prernaargal.blogspot.com and leave the comments also.

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