अगर आप भी इस मंच पर कवितायेँ प्रस्तुत करना चाहते हैं तो इस पते पर संपर्क करें... edit.kavitabazi@gmail.com

Sunday, September 4, 2011

तुझको मिले अब तो चाहत तेरी



मेरी दुआ है रब से, कि पूरी हो आरजू तेरी,
मेरी अल्तजा है उस खुदा से, मोहब्बत मेरी,
मुझे तू मिले, ना मिले, अब ये किस्मत मेरी,
फिर भी तुझको मिले अब तो चाहत तेरी॥

इन दिनों हमें शौक है, याद करना तुम्हें,
और तुम्हारी आदत है, भूल जाना हमें,
तुझे हिचकी का आना है हरकत मेरी
फिर भी तुझको मिले अब तो चाहत तेरी॥

ये आज कल अश्क बहाना है हरकत मेरी,
फिर भी तुझको मिले अब तो चाहत तेरी॥

1 comment: