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Thursday, October 13, 2011

पलकों की पीर



-- Image from google with thanks.
पलकों में बसी है पीर बहुत,
बरखा के आने की बारी है।
वो मुझमें रहती दूर बहुत,
ज्यों बादल पानी की यारी है।

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    बहुत बहुत बधाई ||

    http://dineshkidillagi.blogspot.com/2011/10/blog-post_13.html

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  2. aapka dhanyawad sanjay ji aur aapki rachanaye utkrist hai ..bhavnao se oot prot ..aur vastavikata se rangi hui aapko bahut shubhkamnaye aur aapka bhi swagat hai hamesa

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

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